May 29, 2024

Black Hole Tragedy in Hindi 1756 संपूर्ण जानकारी

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Black Hole Tragedy

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Black Hole Tragedy in Hindi संपूर्ण जानकारी

यह कहानी है इंडियन हिस्टरी से जुड़े एक बेहद दुखद घटना की है ये तो हम जानते ही हैं की कैसे अंग्रेजों ने भारत पर लगभग 200 सालों तक राज़ किया और इस दौरान उन लोगों ने भारतवर्ष के लोगों को बुरी तरह बेहाल किया लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब बंगाल के एक राजा नवाब सिराजुद्दौला ने उल्टा अंग्रेज सिपाहियों के साथ एक बेहद शर्मनाक और दर्दनाक हादसे को अंजाम दिया और इसी घटना को black hole tragedy का नाम दिया गया है कहा जाता है

इंग्लैंड के स्कूल का हर एक बच्चा भारत से जुड़ी कुछ और बात जानता हो या ना जानता हो लेकिन ये तीन चीजें जरूर जानता है जिसमें पहली थी ब्लैक होल ट्रैजिडी दूसरी थी बैड लोन और तीसरी फर्स्ट फ्लोर ऑफ इंडिपेंडेन्स यानी 1857 के क्रांति अब इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं की ये ब्लैक होल ट्रैजिडी इतिहास का कितना अहम हिस्सा थी और ये कहा जाता है कि भारत के इतिहास का रुख बदलने वाले बैटल ऑफ को जन्म देने वाले इमीडिएट कारणों में ये ब्लैक होल ट्रैजिडी मुख्य रूप से शामिल थी बैटल ऑफ प्लासी एक ऐसा इवेंट था जिसने आधुनिक भारत का नक्शा पूरी तरह से बदल दिया

Black Hole Tragedy की शुरुआत

17th सैंचुरी तक भारत की धरती पर यूरोपियन पॉवर्स का आगमन हो चुका था उधर यूरोप में 1740 में हुए वॉर ऑफ ऑस्ट्रियन सक्सेशन के बाद ब्रिटिश और फ्रांस के बीच की लड़ाई धरती के हर कोने तक पहुँच चुकी थी इंडिया भी इसमें कोई एक्सेप्शन नहीं था

यहाँ पर भी ब्रिटिश और फ़्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच एक कॉम्पिटिशन जारी था इंडियन पॉलिटिक्स की बात करें तो 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन होना शुरू हो चुका था Power केवल क्षेत्रीय राजाओं के हाथों में ही रह गयी थी उसी तरह बंगाल तकनीकी रूप से मुगल साम्राज्य का हिस्सा होते हुए भी अब एक आजाद प्रान्त के रूप में उभर रहा था लेकिन बंगाल उस समय भारत का इकोनॉमिक पावर हाउस था इसकी वजह से सभी युरोपिअन पॉवर्स बंगाल पर अपना कब्जा ज़माना चाहती थी इस दौरान अंग्रेजों ने अपना साम्राज्य सुरक्षित करने के लिए बंगाल में जगह जगह मिलिट्री डिफेंस सिस्टम बिल्ड करने शुरू कर दी 

Black Hole Tradegy
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इन्ही में से एक किला था फोर्ट विलियम जो 1690 तक बनकर तैयार हो गया था, यही किला black hole tragedy जैसे भारतीय इतिहास के कुछ इन्फॉर्मेशन इवेंट्स की साइट बना, फिर जैसे जैसे वो बंगाल में विस्तृत होते गए उनकी नीयत में बदलाव आना शुरू हो गया क्योंकि बंगल उस समय इंडिया का और रिसोर्सफुल स्टेट था पूरे भारत में होने वाले व्यापार में अकेले बंगाल का 60% योगदान था कंपनी के लोग अपने मकसद को पूरा करने के लिए छोटे छोटे प्रांतों के राजाओं को महंगे तोहफे देकर उनके साथ समझौता कर लिया करते थे तो इस तरह इन रूलर्स को भर भर के पैसा मिल जाया करता था

ब्रिटिशर्स को बिना किसी रोक टोक के ये एक्स्प्लोसिव ट्रेड करने की आजादी तो अब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी बेहिसाब तरीके से प्रॉफिट जेनरेट कर रही थी और इसका सबसे बुरा इफ़ेक्ट पड़ रहा था

डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज़ और बिज़नेस पर ज़मींदार मर्चेन्ट्स सभी ब्रिटिशर्स की गतिविधियों से नाखुश थे क्योंकि उन्हीं के राज्य में आकर उन्हीं का सारा प्रॉफिट तो ब्रिटिशर्स लूटकर ले जा रहे थे इसके अलावा बंगाल की लगभग 20 मिलियन लोगों की पॉप्युलेशन जिनको एक छोटे मुस्लिम राज किया करते थे वो भी ब्रिटिशर्स से खुश नहीं थे

सिराजुद्दीन का राज्य अभिषेक in Black Hole Tragedy in Hindi

ऐसे माहौल में 1756 में बंगाल के नवाब अली खान की मृत्यु हो जाती है और बंगाल की गद्दी पर 21 साल की एक यंग स्ट्रॉन्ग और डाइनैमिक शासक का आगमन होता है नवाब सिराजुद्दौला को शुरुआत से ही ब्रिटिशर्स के कारनामों के ऊपर शक होने लगा था उन्हें लगता था कि अंग्रेज उनको मिले हुए अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं

इसी के चलते उन्होंने अंग्रेजों से सवाल जवाब करना शुरू किया हालांकि अंग्रेजों का कहना था कि वह तो केवल अपनी कम्पनीज़ की सुरक्षा के लिए इन किलों का निर्माण कर रहे हैं लेकिन नवाब सिराजुद्दौला ये जान चूके थे कि ब्रिटिशर्स का मकसद केवल ट्रेड और उससे मिलने वाला प्रॉफिट ही नहीं है बल्कि वो धीरे धीरे इन में अपना ऐड्मिनिस्ट्रेटिव सिस्टम स्थापित कर रहे थे तो सिराजुद्दौला इनसे बहुत नाराज थे इसके दो कारण थे पहला तो ये है

ये कम्पनीज़ अब अपने प्रॉफिट का कोई भी हिस्सा उनको नहीं दे रही थी और दूसरा ये कि वो अब धीरे धीरे अपने पांव जमाकर राजाओं से उनका पॉलिटिकल कंट्रोल छीनने की भी तैयारी में थे जिससे इन राजाओं की सॉफ्टी पर खतरा बढ़ता जा रहा था ऊपर से कर्नाटक युद्ध में ब्रिटिशर्स की जीत के बाद सिराजुदौला का शक यकीन में बदलता जा रहा था लेकिन यह होने देना नहीं था इसीलिए सबसे पहले उन्होंने बंगाल के गवर्नर को एक अल्टिमेटम पास किया की इन कम्पनीज़ के द्वारा किये जा रहे हैं दुर्गकरण पर पाबंदी लगाई जाए हालांकि फ़्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी सिराजुद्दौला के आदेश मानकर रुक गई लेकिन ब्रिटिशर्स ने ये बात नहीं मानी और अपनी किलेबंदी चालू रखी बस फिर क्या था सिराजुद्दौला इससे बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने अब ब्रिटिशर्स को सबक सिखाने की ठानी 

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सिराजुद्दीन ने बदला लेने के लिए क्या किया ?

ब्रिटिशर्स को सबक सिखाने के लिए सिराजुद्दौला ने अपनी सेना तैयार की और 16th जून 1756 को कलकत्ता पर हमला बोल दिया कहा जाता है कि उनकी सेना में 50,000 से भी ज्यादा पैदल सैनिक 500 हाथी और 50 तोपें शामिल थी और ये ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना को आसानी से कुचल सकती थी खैर 16th जून को नवाब अपनी सेना के साथ कलकत्ता पहुंचे और उन्होंने शहर को चारों तरफ से घेर लिया

फिर अंग्रेजों को लगने लगा कि उनकी हार निश्चित है तब गवर्नर जॉन डायरेक् अपने कमांडर काउन्सल के सभी सदस्यों महिलाओं और बच्चों के साथ हुगली नदी पर खड़ी एक बोट में बैठकर बच निकले उन्होंने जॉन हॉल वेल के नेतृत्व में अपने 170 सैनिकों की टुकड़ी को किले की रक्षा करने के लिए वहीं छोड़ दिया 20th जून 1756 को सिराजुद्दौला की आर्मी ने किला की दीवारों को तोड़कर फोर्ट के अंदर हमला कर दिया इसी को देखते हुए अंग्रेजों ने उनके आगे आत्मसमर्पण कर दिया सिराजुद्दौला ने किला के बीचोबीच अपना दरबार लगाया वहाँ उन्होंने दो घोषणाएं की पहली तो ये की कलकत्ता का नाम बदलकर अलीनगर रखा जा रहा है और दूसरा राजा मानिकचंद को आरक्षण घोषित किया गया, हॉलवेल ने अपने एक आर्टिकल में बाद में लिखा कि उस दिन उनके हाथ बांधकर उनको नवाब के सामने पेश किया गया

नवाब ने उनके हाथ खोलने का आदेश दिया और उनके साथ किसी भी तरह की बदसलूकी ना किये जाने का वादा किया साथ ही साथ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ़ अपनी नाराजगी भी जताई

उसके बाद नवाब वहाँ से उठकर एक अंग्रेज के घर में आराम करने चले गए नवाब के जाने के बाद उनके सैनिकों ने अंग्रेज कैदियों के साथ नियंत्रित लूटपाट करनी शुरू कर दी हालांकि अब तक उन्होंने अंग्रेजों के साथ ज्यादा टॉर्चर नहीं किया लेकिन शाम होते होते उनका व्यवहार बदल गया

असल में एक अंग्रेज शराब के नशे में अपनी पिस्टल से नवाब के एक सैनिक को मार दिया जब इस बात की शिकायत नवाब के पास पहुंची तो वो बहुत गुस्सा हो इसके बाद नवाब के सलाहकारों ने उन्हें सलाह दी इतने सारे अंग्रेजी कैदियों को रातभर खुले में छोड़ना खतरनाक होगा इसलिए उनको कैदियों को रखे जाने वाली में डाल दिया जाना चाहिए विलियम के बेसमेंट में मौजूद थी इसी का नाम Black Hole पड़ा, बस फिर क्या था नवाब ने ऐसा ही करने का आदेश दिया

वहाँ मौजूद 170 कैदियों को बिना किसी चीज़ का लिहाज़ कि ये 18 * 14 फ़ीट की कोठरी में डाल दिया गया उसमें केवल दो खिड़कियां थीं और आपको जानकर हैरानी होगी ये कोठरी सिर्फ तीन या चार कैदियों को रखने के लिए बनाई गई थी लेकिन उस रात इसमें 170 कैदियों को ठूंस दिया गया

अंग्रेजी कैदियों की मौत का कारण in Black Hole Tragedy

जून के महीने की वो रात शायद साल की सबसे गर्म और उमस भरी रात थी ऐसे में बिना खाना पानी और हवा के उस कोठरी में इतने सारे बन्दियों को शाम 7:00 बजे से लेकर सुबह 6:00 बजे तक रखा गया और आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस कोठरी के अंदर की हालत क्या रही होगी कुछ हिस्टोरियंस बताते हैं कि जिन सैनिकों को इन कैदियों की निगरानी के लिए छोड़ा गया था उनमें से किसी की हिम्मत भी नहीं हुई की वो सो रहे नवाब को जाकर उठाए और जब अगली सुबह सिराजुद्दौला को इस बारे में पता चला तब उन्होंने उस को खोलने का आदेश दिया, जब उस Black Hole का दरवाजा खोला गया तब 146 कैदियों में से सिर्फ 23 कैदी ही बहुत बुरी हालत में जिंदा वापस आये बाकी सभी कैदियों ने गर्मी में दम घुटने की वजह से अपना दम वही तोड़ दिया इसके बाद सभी मरे हुए कैदियों को वहीं पास में बिना किसी रस्मों रिवाज के एक साथ दफना दिया गया और इसी इंसिडेंट को इतिहास पे Black Hole Tragedy के नाम से जाना गया

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 सच्चाई या झूठ Black Hole Tragedy in Hindi

यहाँ एक बात गौर करने वाली यह है कि इस पूरी Black Hole Tragedy का हॉलवेल द्वारा दिया गया विवरण कई हिस्टोरियन्स नकार चूके हैं उनका मानना है कि असल में इन कैदियों की संख्या बहुत कम थी और मरने वाले कैदियों की संख्या तो उससे भी कम कुछ हिस्टोरियंस कहते हैं कि हॉलवेल विवरण में जिन लोगों को मरा हुआ दिखाया गया वो असल में उस दिन नहीं मारे गए थे बल्कि वो Black Hole Tragedy के आगे पीछे हुई लड़ाई में मारे गए थे तो हॉलवेल के अकाउंट्स में मरने वालों का पूरी तरह सच नहीं था बल्कि बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया गया था उस तरह एक और हिस्टोरियन ने अपनी किताब में लिखा है की ये घटना हुई जरूर थी लेकिन असल में इसके जिम्मेदार पूर्ण रूप से सिराजुद्दौला नहीं थे बल्कि इनके ऊपर नजर रखने का जिम्मा उन्होंने अपने सैनिकों पर छोड़ दिया था

उनको इस तरह Black Hole में ठूंसकर मारने का या Black Hole Tragedy का आदेश उन्होंने अपने मुँह से नहीं दिया था लेकिन मौजूदा हिस्टोरिकल रिकॉर्ड के मुताबिक ये बात भी सच है कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने किसी सैनिक को इस जुर्म के लिए ना तो कोई सजा दी और ना ही कभी कोई दुख प्रकट किया इसके अलावा कई हिस्टोरियन्स ये तक भी कहते हैं कि पूरा का पूरा इवेंट एक मिथ के अलावा और कुछ नहीं था, वो कहते हैं

ये अफवाह अंग्रेजों के द्वारा ही उड़ाई गई थी जिससे कि उनको बंगाल पर हमला करने का बहाना मिल जाए क्योंकि जैसे ही इस इंसिडेंट की खबर ईस्ट इंडिया कंपनी के हेडक्वार्टर्स तक पहुंची वैसे ही बोल लोग आग बबूला हो गए कहा जाता है कि Black Hole Tragedy बाद हर अंग्रेज के सीने पे बदले की भावना भड़क रही थी वो सिराजुद्दौला से ही इस का बदला लेना चाहते थे इसी के रिस्पॉन्स मैं रॉबर्ट क्लाइव को भारत भेजा गया रॉबर्ट क्लाइव ने 1757 में वापस कलकत्ता को अपने कब्जे में ले लिया, इतना ही नहीं उन्होंने आगे बढ़कर के सिराजुद्दौला के खिलाफ़ जंग छेड़ दी इसी लड़ाई को “बैटल ऑफ प्लासी” के नाम से जाना जाता है

Black Hole Tredagy
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बैटल आफ पलासी में अंग्रेजों का षड्यंत्र

“बैटल ऑफ प्लासी” के लड़ाई में अंग्रेजों ने कूटनीतिक षडयंत्र रचा और सिराजुदौला की आर्मी के कमांडर को लालच देकर अपने गुट में शामिल कर लिया और ये बगावत देखने के बाद सिराजुद्दौला रणभूमि छोड़कर मुर्शिदाबाद भाग गए, जहाँ उनको मार दिया गया तो सच भले ही जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि Black Hole Tragedy का सहारा लेते हुए अंग्रेजों ने भारत में अपने साम्राज्य के विस्तार बाद को जायज ठहराया और यही इंसिडेंट बैटल ऑफ प्लास्टिक का एक ट्रिगर पॉइंट जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव रखी और इसी के बाद ब्रिटिशर्स ने अगले 200 साल तक भारत पर रूप से राज़ किया 

Most asked Black Hole Tragedy FAQ’s

 

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